पश्चिम चंपारण। बिहार के पश्चिम चंपारण जिले ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा विश्व स्तर पर मनवाया है। योगापट्टी प्रखंड के युवा खिलाड़ी सारांश कुमार ने प्रथम विश्व योगासन स्पोर्ट्स चैंपियनशिप 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए रिदमिक पेयर योगासन स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि से पूरे जिले, बिहार और देश में खुशी की लहर है। गुजरात के अहमदाबाद स्थित ट्रांसस्टेडिया के इका एरिना में 4 से 8 जून 2026 तक आयोजित इस विश्व स्तरीय प्रतियोगिता में 78 देशों के 500 से अधिक खिलाड़ियों ने भाग लिया। योगासन खेल के इतिहास में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर आयोजित इस चैम्पियनशिप में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 102 स्वर्ण, 9 रजत और 3 कांस्य पदकों सहित कुल 114 पदक अपने नाम किए। इस गौरवशाली भारतीय अभियान में सारांश कुमार का स्वर्ण पदक विशेष उपलब्धि के रूप में दर्ज हुआ।

सारांश की सफलता केवल एक पदक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, अनुशासन, समर्पण और निरंतर अभ्यास की प्रेरणादायक कहानी है। सीमित संसाधनों और साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद उन्होंने अपने कठिन परिश्रम और अटूट आत्मविश्वास के बल पर विश्व मंच पर भारत का नाम रोशन किया। उनकी यह उपलब्धि जिले के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे उनके प्रशिक्षक पवन कुमार का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जिला योगासन खेल संघ, पश्चिम चंपारण के सचिव और अनुभवी योग प्रशिक्षक के रूप में पवन कुमार वर्षों से जिले में योगासन खेल को बढ़ावा देने में जुटे हैं। वे विद्यालयों और महाविद्यालयों में नियमित प्रशिक्षण देकर खिलाड़ियों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। सारांश की विश्व विजय उनके मार्गदर्शन, तकनीकी दक्षता और अथक मेहनत का प्रतिफल मानी जा रही है।

पश्चिम चंपारण जैसे सीमावर्ती जिले से किसी खिलाड़ी का विश्व चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीतना पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। यह उपलब्धि साबित करती है कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती।
सारांश कुमार और उनके प्रशिक्षक पवन कुमार ने यह सिद्ध कर दिया है कि चंपारण की धरती केवल ऐतिहासिक आंदोलनों की ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर नए कीर्तिमान गढ़ने वाली प्रतिभाओं की भी भूमि है। यह स्वर्ण पदक पश्चिम चंपारण, बिहार और भारत के खेल इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में हमेशा याद किया जाएगा।













