बगहा। प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने और सुरक्षित भवन निर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से राजमिस्त्रियों के लिए दस दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को भूकंपरोधी निर्माण तकनीकों, भवनों के मजबूतीकरण तथा गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य के आधुनिक तरीकों की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सभी प्रतिभागियों का भौतिक सत्यापन भी किया गया। कार्यक्रम में आपदा प्रबंधन विभाग के अभियंता शिवेंद्र सिंह ने प्रशिक्षक की भूमिका निभाते हुए राजमिस्त्रियों को निर्माण कार्य से जुड़ी विभिन्न तकनीकी जानकारियां दीं। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में सुरक्षित और टिकाऊ भवन निर्माण की आवश्यकता पहले से अधिक बढ़ गई है। ऐसे में निर्माण कार्य से जुड़े लोगों को आधुनिक तकनीकों का ज्ञान होना बेहद जरूरी है। प्रशिक्षण के दौरान राजमिस्त्रियों को विस्तार से बताया गया कि भवन निर्माण में किन मानकों और तकनीकों का पालन करने से भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय जान-माल की क्षति को कम किया जा सकता है। उन्हें भवन की नींव, दीवारों, छत और संरचनात्मक ढांचे को मजबूत बनाने के वैज्ञानिक तरीकों से अवगत कराया गया। साथ ही निर्माण सामग्री के सही चयन और उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया। इसके अलावा पुराने, जर्जर और क्षतिग्रस्त भवनों की मरम्मत एवं मजबूतीकरण की आधुनिक तकनीकों का भी प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों को यह सिखाया गया कि किस प्रकार संरचनात्मक कमजोरियों की पहचान कर भवनों को अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है। प्रशिक्षण में व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से विभिन्न तकनीकों का प्रदर्शन भी किया गया, जिससे राजमिस्त्रियों को उन्हें समझने और अपनाने में आसानी हो सके।
अभियंता शिवेंद्र सिंह ने कहा कि आपदा के दौरान सबसे अधिक नुकसान कमजोर निर्माण वाले भवनों को होता है। यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों और वैज्ञानिक तकनीकों के अनुसार किया जाए तो नुकसान की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित राजमिस्त्री अपने-अपने क्षेत्रों में सुरक्षित निर्माण तकनीकों का उपयोग कर लोगों को बेहतर और मजबूत भवन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। दस दिवसीय इस आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में करीब दो दर्जन राजमिस्त्रियों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों को निर्माण कार्य के तकनीकी पहलुओं, गुणवत्ता नियंत्रण, निर्माण सामग्री के सही उपयोग तथा सुरक्षा मानकों की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया और उन्हें व्यवहारिक अनुभव साझा किए। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद प्रतिभागियों ने इसे अत्यंत उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि यहां मिली जानकारी उनके कार्य को अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण बनाने में मदद करेगी। साथ ही उन्होंने सीखी गई तकनीकों को व्यवहार में लागू कर सुरक्षित एवं भूकंपरोधी भवन निर्माण को बढ़ावा देने का संकल्प भी व्यक्त किया। जाआपदा प्रबंधन विभाग का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल निर्माण कार्य की गुणवत्ता बढ़ाने में सहायक हैं, बल्कि भविष्य में आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे।












