बेतिया। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 23वीं किस्त जारी किए जाने के अवसर पर पश्चिम चंपारण जिले में शनिवार को “पीएम किसान उत्सव दिवस” उत्साह, जागरूकता और व्यापक जनभागीदारी के साथ मनाया गया। प्रधानमंत्री द्वारा पश्चिम बंगाल के हुगली से किसानों के लिए आयोजित कार्यक्रम का सीधा प्रसारण जिले के दोनों कृषि विज्ञान केंद्रों सहित जीविका के सभी 57 महिला संकुल स्तरीय संघों में देखा गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में किसान, जीविका दीदियाँ, कृषि कर्मी और ग्रामीण समुदाय के लोग कार्यक्रम से जुड़े। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित किसानों और जीविका दीदियों ने प्रधानमंत्री के संबोधन को ध्यानपूर्वक सुना तथा केंद्र सरकार द्वारा संचालित विभिन्न किसान कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त की। पीएम-किसान योजना के तहत किसानों के खातों में सम्मान निधि की नई किस्त जारी होने पर प्रतिभागियों ने प्रसन्नता व्यक्त की और इसे कृषि क्षेत्र को मजबूती प्रदान करने वाला कदम बताया।

कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर में आयोजित कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने किसानों एवं जीविका दीदियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि योजना के तहत मिलने वाली राशि का उपयोग गुणवत्तापूर्ण बीज, उन्नत कृषि आदानों की खरीद, सिंचाई सुविधाओं के विकास तथा कृषि आधारित आय सृजन गतिविधियों में किया जाना चाहिए। इससे किसानों की उत्पादकता बढ़ेगी और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। उन्होंने किसानों को उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग के प्रति जागरूक करते हुए कहा कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और उत्पादन लागत कम करने के लिए संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन बेहद आवश्यक है। उन्होंने जानकारी दी कि 1 जून से 30 जून तक “खेत बचाओ अभियान” चलाया जा रहा है, जिसके माध्यम से किसानों को जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा करना, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना तथा टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा देना है।

इस अवसर पर जीविका के युवा पेशेवर कृषि प्रिंस कुमार ने किचन गार्डन की उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किचन गार्डन परिवारों को पौष्टिक एवं ताजी सब्जियां उपलब्ध कराने के साथ-साथ अतिरिक्त आय का स्रोत भी बन सकता है। उन्होंने किसानों और जीविका दीदियों को बीजों के जैविक उपचार, जैविक कीटनाशकों के उपयोग तथा प्राकृतिक खेती की तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल उत्पादन लागत घटाती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और मानव स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।

जिले के सभी 57 जीविका महिला संकुल स्तरीय संघों में भी दीदियाँ सामूहिक रूप से कार्यक्रम के लाइव प्रसारण से जुड़ी रहीं। विभिन्न स्थानों पर आयोजित कार्यक्रमों में प्रतिभागियों ने किसान कल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने, आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने तथा कृषि को अधिक लाभकारी बनाने का संकल्प दोहराया। कार्यक्रम ने किसानों और ग्रामीण महिलाओं को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता एवं नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण संदेश दिया।












