बगहा। सीमांत सुरक्षा बल (एसएसबी) की 65वीं वाहिनी, बेतिया में सोमवार को “सर्पदंश (Snake Bite) जागरूकता सत्र” का आयोजन किया गया। इस विशेष जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य कार्मिकों को सर्पदंश से जुड़े जोखिमों, बचाव के उपायों, प्राथमिक उपचार तथा आपातकालीन परिस्थितियों में अपनाई जाने वाली सावधानियों के प्रति जागरूक बनाना था। कार्यक्रम का संचालन डॉ. बिपिन कुमार, कमांडेंट (मेडिकल), 65वीं वाहिनी द्वारा किया गया। उन्होंने उपस्थित कार्मिकों को सर्पदंश की घटनाओं के दौरान घबराने के बजाय सही और वैज्ञानिक तरीके से प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि बरसात और गर्मी के मौसम में सांपों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं, ऐसे में सतर्कता और सही जानकारी जीवन रक्षक साबित हो सकती है। सत्र के दौरान डॉ. बिपिन कुमार ने सर्पदंश से बचाव के विभिन्न उपायों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कार्यस्थल, बैरक, आवासीय परिसर और खुले क्षेत्रों में साफ-सफाई बनाए रखना, झाड़ियों एवं कचरे को समय-समय पर हटाना तथा अंधेरे स्थानों में बिना सावधानी के प्रवेश न करना बेहद आवश्यक है। इसके अलावा रात के समय टॉर्च का उपयोग करने और सुरक्षात्मक जूते पहनने की सलाह भी दी गई।

जागरूकता कार्यक्रम में सर्पदंश की स्थिति में दिए जाने वाले प्राथमिक उपचार (First Aid) पर भी विशेष चर्चा की गई। कार्मिकों को बताया गया कि किसी व्यक्ति को सांप काटने पर उसे शांत रखें, प्रभावित अंग को कम से कम हिलाएं तथा जल्द से जल्द निकटतम स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचाएं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि झाड़-फूंक, घाव को काटना, विष चूसने का प्रयास करना या बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई उपचार करना नुकसानदायक हो सकता है। सत्र में समय पर चिकित्सकीय सहायता प्राप्त करने के महत्व को भी रेखांकित किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि सर्पदंश के मामलों में शीघ्र उपचार और एंटी-वेनम की उपलब्धता मरीज की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना आवश्यक है।

कार्मिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 65वीं वाहिनी परिसर के कार्यालय, मैस एवं बैरक क्षेत्रों में सर्पों की रोकथाम और प्रबंधन से संबंधित आवश्यक दिशा-निर्देश भी तैयार किए गए हैं। इन दिशा-निर्देशों को विभिन्न प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित किया गया है, ताकि सभी कार्मिक उन्हें पढ़ सकें और दैनिक जीवन में आवश्यक सावधानियों का पालन कर सकें। अधिकारियों ने बताया कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम न केवल कार्मिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं, बल्कि उन्हें आपात परिस्थितियों में त्वरित और सही निर्णय लेने के लिए भी सक्षम बनाते हैं। सत्र के दौरान उपस्थित जवानों और अधिकारियों ने विषय से जुड़े प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया।
कार्यक्रम के अंत में यह संदेश दिया गया कि “सतर्कता, सही जानकारी और समय पर उपचार ही सर्पदंश से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।” एसएसबी का यह प्रयास कार्मिकों को अधिक जागरूक, सतर्क और आपदा प्रबंधन के प्रति सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।












