बगहा। उत्तर प्रदेश और नेपाल सीमा से सटे बगहा अनुमंडलीय अस्पताल की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराने के मामले में बिहार राज्य सूचना आयोग ने अस्पताल प्रशासन के रवैये पर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मांगी गई सूचनाएं सार्वजनिक श्रेणी की हैं और उन्हें छिपाने का कोई औचित्य नहीं बनता। आदेश का पालन नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। मामला आरटीआई कार्यकर्ता नरेंद्र कुमार राय द्वारा दायर आवेदन से जुड़ा है। उन्होंने अस्पताल में एक्स-रे सेवा संचालन से संबंधित विभिन्न जानकारियां मांगी थीं। आवेदन में एक्स-रे संचालन की अनुमति, किए गए अनुबंध, तकनीशियन एवं रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी चाही गई थी। लेकिन अस्पताल प्रशासन ने सूचना देने से इनकार कर दिया। प्रशासन का तर्क था कि मांगी गई सूचनाएं मरीजों की गोपनीयता और उपचार संबंधी अभिलेखों से जुड़ी हुई हैं, इसलिए उन्हें साझा नहीं किया जा सकता।

हालांकि, बिहार राज्य सूचना आयोग ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। आयोग द्वारा अभिलेखों की समीक्षा के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि आवेदक ने किसी मरीज के उपचार या व्यक्तिगत स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड की मांग नहीं की थी। इसके विपरीत, मांगी गई सूचनाएं अस्पताल में संचालित सेवाओं, नियुक्तियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से संबंधित थीं, जो सार्वजनिक सूचना के दायरे में आती हैं। राज्य सूचना आयुक्त प्रकाश कुमार ने अपने आदेश में कहा कि अस्पताल प्रशासन ने सूचना के अधिकार अधिनियम की मूल भावना के अनुरूप कार्य नहीं किया। आयोग ने लोक सूचना पदाधिकारी-सह-उपाधीक्षक को निर्देश दिया है कि संबंधित बिंदुओं की सूचनाएं, आवश्यक प्रमाण-पत्रों को छोड़कर, आवेदक को उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही आयोग को इसकी अनुपालन रिपोर्ट भी भेजी जाए।
आयोग ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय के भीतर सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ आरटीआई अधिनियम की धारा-20 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस धारा के अंतर्गत सूचना देने में लापरवाही, अनावश्यक विलंब या गलत कारणों से सूचना रोकने पर आर्थिक दंड लगाए जाने का प्रावधान है। सूचना आयोग की इस सख्त टिप्पणी ने अस्पताल प्रशासन की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी संस्थानों से अपेक्षा की जाती है कि वे जनता को जवाबदेह रहें और कानून के अनुरूप सूचनाएं उपलब्ध कराएं। लेकिन इस मामले में सूचना छिपाने की कोशिश ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर संदेह पैदा कर दिया है।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बगहा अनुमंडलीय अस्पताल आयोग के आदेश का पालन करता है या नहीं। यदि निर्देशों की अनदेखी की गई तो संबंधित अधिकारियों को कानूनी और आर्थिक दंड का सामना करना पड़ सकता है, जिससे अस्पताल प्रशासन की जवाबदेही और अधिक कठघरे में आ जाएगी।










