
बगहा अनुमंडल में मंगलवार को दवा दुकानों की एक दिवसीय बंदी का व्यापक असर देखने को मिला। बगहा केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन के आह्वान पर बगहा एक, बगहा दो, वाल्मीकि नगर, हरनाटांड़, रामनगर, चौतरवा और भैरोगंज समेत अनुमंडल के अधिकांश क्षेत्रों में मेडिकल दुकानें बंद रहीं। बंदी के कारण आम लोगों और मरीजों को दवाएं खरीदने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
हालांकि मरीजों की सुविधा और आपातकालीन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रमुख स्थानों पर एक-एक मेडिकल दुकान खुली रखी गई थी, ताकि गंभीर मरीजों को आवश्यक दवाएं उपलब्ध हो सकें। अनुमंडलीय अस्पताल के आसपास भी सीमित संख्या में दवा दुकानों को खोलने की अनुमति दी गई थी। यह बंदी अखिल भारतीय दवा विक्रेता संघ के आह्वान तथा राज्य दवा विक्रेता संघ के निर्देश पर आयोजित की गई। संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि पश्चिम चंपारण जिला संगठन के समर्थन में यह निर्णय लिया गया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष रजनीश भालोटिया और सचिव अमित कुमार ने कहा कि देशभर के दवा विक्रेता लंबे समय से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इनमें ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने, बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों द्वारा मनमाने तरीके से दवाओं की कीमत तय करने पर नियंत्रण लगाने तथा दवा व्यवसाय से संबंधित कुछ सरकारी अधिसूचनाओं को वापस लेने की प्रमुख मांग शामिल है। संघ का कहना है कि इन मुद्दों को लेकर सरकार से लगातार बातचीत और मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। इसी कारण देशभर के दवा विक्रेताओं ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया।
बंदी के दौरान शहर की अधिकांश मेडिकल दुकानें बंद रहीं। वहीं अनुमंडलीय अस्पताल के समीप स्थित खुशी मेडिकल के व्यवस्थापक मो. नुरैन ने बताया कि संघ की अनुमति से इमरजेंसी दवा उपलब्धता सुनिश्चित की गई थी, ताकि किसी भी मरीज को गंभीर स्थिति में परेशानी का सामना न करना पड़े। आंदोलन के दौरान दवा विक्रेताओं ने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। सभी दुकानदारों ने अपनी दुकानों पर काला बिल्ला लगाकर सरकार के प्रति नाराजगी जताई। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।















