
पश्चिमी चंपारण। जिले के बगहा नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत चंडी स्थान मलाही टोला गांव मंगलवार को उस समय शोक में डूब गया, जब सेना के सूबेदार मेजर हरेराम गिरी का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा। जैसे ही वीर जवान का शव गांव पहुंचा, परिजनों के बीच चीख-पुकार मच गई और पूरे इलाके का माहौल गमगीन हो उठा। गांव के लोग अपने फौजी सपूत के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में उमड़ पड़े। जानकारी के अनुसार सूबेदार मेजर हरेराम गिरी वर्तमान में विशाखापट्टनम में तैनात थे। ड्यूटी के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। प्रारंभिक जांच में हार्ट अटैक की पुष्टि होने के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए दिल्ली स्थित आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही गांव सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। मंगलवार को सेना के वाहन से जब उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो हजारों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। ग्रामीणों ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को श्रद्धांजलि अर्पित की। गांव से लेकर गंडक नदी तट तक लोगों का जनसैलाब उनके अंतिम यात्रा में शामिल रहा। इस दौरान “भारत माता की जय” और “हरेराम गिरी अमर रहें” के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। गंडक नदी तट पर सेना के जवानों ने उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी। राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम संस्कार के दौरान उपस्थित लोगों की आंखें नम थीं। हर कोई उनके मिलनसार स्वभाव, अनुशासन और देशभक्ति की चर्चा करता नजर आया। परिजनों ने बताया कि हरेराम गिरी की पहली नियुक्ति 28 फरवरी 1996 को बॉम्बे में हुई थी। लगभग तीन दशक की सेवा अवधि में उन्होंने मेरठ, लेह, जम्मू समेत कई संवेदनशील और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में देश सेवा की। वर्तमान में वे विशाखापट्टनम में पदस्थापित थे। उनकी सेवा के अभी लगभग दो वर्ष शेष थे और वर्ष 2028 में उनका सेवानिवृत्त होना तय था। सूबेदार मेजर हरेराम गिरी अपने पीछे पत्नी, दो पुत्री और एक पुत्र छोड़ गए हैं। उनकी बड़ी पुत्री रांची में रहकर वकालत की पढ़ाई कर रही है, जबकि पुत्र बॉम्बे में इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त कर रहा है। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव के लोग लगातार उनके घर पहुंचकर परिजनों को ढांढस बंधा रहे हैं। उनके निधन पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा ग्रामीणों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सभी ने कहा कि हरेराम गिरी ने अपने जीवन का अधिकांश समय देश सेवा में समर्पित किया और उनका योगदान सदैव याद रखा जाएगा। गांववासियों ने उन्हें सच्चा देशभक्त बताते हुए कहा कि उनका जाना पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है।

















