बगहा। प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान (पीएमएसएमए) की 10वीं वर्षगांठ के अवसर पर मंगलवार को बगहा अनुमंडलीय अस्पताल में विशेष जांच शिविर का आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश और नेपाल सीमा से सटे इस क्षेत्र के लिए आयोजित शिविर में बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाओं ने भाग लिया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयोजित इस पहल का उद्देश्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना तथा गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित मातृत्व के प्रति जागरूक करना रहा।
शिविर के दौरान 100 से अधिक गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की गई। विशेषज्ञ चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की टीम ने महिलाओं की खून, यूरिन, हीमोग्लोबिन, वजन, ब्लड शुगर, एलएफटी (लिवर फंक्शन टेस्ट) तथा केएफटी (किडनी फंक्शन टेस्ट) सहित कई आवश्यक जांचें कीं। जांच के बाद गर्भवतियों को सुरक्षित प्रसव, संतुलित एवं पौष्टिक आहार, नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और आवश्यक सावधानियों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई।

महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. मनीषा श्रीवास्तव और डॉ. तारिक नदीम के नेतृत्व में स्वास्थ्य टीम ने मरीजों की जांच की। चिकित्सकों ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच और समय पर उपचार से कई जटिलताओं को रोका जा सकता है। शिविर में जांच के उपरांत महिलाओं के बीच नि:शुल्क दवाओं का भी वितरण किया गया। अस्पताल प्रबंधन की ओर से गर्भवती महिलाओं एवं उनके परिजनों के लिए जलपान सहित अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की गई थी। इससे शिविर में आए मरीजों के बीच सकारात्मक माहौल देखने को मिला। वहीं प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. ए.के. तिवारी ने विभिन्न जांच काउंटरों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा स्वास्थ्यकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
हालांकि शिविर के दौरान अस्पताल की कुछ महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के अब तक शुरू नहीं होने का मुद्दा भी सामने आया। कई गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों ने अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सुविधा उपलब्ध नहीं होने पर नाराजगी जताई। उनका कहना था कि चिकित्सकों द्वारा अल्ट्रासाउंड जांच लिखे जाने के बावजूद उन्हें निजी केंद्रों पर जाकर महंगे खर्च पर जांच करानी पड़ती है। स्थानीय लोगों के अनुसार अस्पताल में वर्षों पहले अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध करा दी गई थी। मशीन की मरम्मत भी कराई जा चुकी है, लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक कारणों से सेवा अब तक शुरू नहीं हो सकी है। इसी तरह राज्यसभा सांसद निधि से उपलब्ध कराई गई डायलिसिस मशीन भी पर्याप्त स्थान के अभाव में उपयोग से बाहर पड़ी हुई है। इसके अलावा अस्पताल के एमएनसीयू (मदर एंड न्यूबॉर्न केयर यूनिट) कक्ष का संचालन भी विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित कर्मियों की कमी के कारण पूरी क्षमता से नहीं हो पा रहा है। स्थानीय नागरिकों और मरीजों ने उम्मीद जताई है कि अस्पताल के नए भवन निर्माण कार्य के पूरा होने के साथ लंबित स्वास्थ्य सुविधाएं भी शुरू होंगी। इससे सीमावर्ती क्षेत्र के हजारों मरीजों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।












