बगहा। नगर के पूर्व सभापति जरीना खातून के आवास पर इन दिनों एक विशेष आम लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह कोई साधारण आम नहीं, बल्कि जापान की प्रसिद्ध और दुनिया के सबसे महंगे आमों में शामिल मियाजाकी (Miyazaki) आम है। इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 2.50 लाख से 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक बताई जाती है। आम की दुर्लभता और इसकी ऊंची कीमत को लेकर लोगों में खास उत्सुकता देखी जा रही है। इसे देखने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। पूर्व सभापति प्रतिनिधि एवं अधिवक्ता फिरोज आलम ने बताया कि उन्होंने पहली बार इस आम के बारे में ऑनलाइन जानकारी प्राप्त की थी। इसकी विशेषताओं और कीमत को जानने के बाद उन्होंने इसे अपने यहां लगाने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक इसकी तलाश करने के बाद विदेश यात्रा के दौरान उन्हें मियाजाकी आम के पौधे मिले। वहां से उन्होंने तीन पौधे खरीदे और अपने घर की छत पर लगाए।

फिरोज आलम के अनुसार, लगाए गए तीन पौधों में से एक पौधे पर इस वर्ष फल आया है। जैसे-जैसे फल का आकार बढ़ने लगा, लोगों की उत्सुकता भी बढ़ती गई। इसकी जानकारी फैलते ही बड़ी संख्या में लोग इसे देखने पहुंचने लगे। सोशल मीडिया पर भी यह आम चर्चा का विषय बन गया है। कई फेसबुक क्रिएटर और डिजिटल कंटेंट निर्माता मौके पर पहुंचकर वीडियो और रील बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं। इसके बाद लगातार विभिन्न जिलों और राज्यों से लोगों के फोन आ रहे हैं, जो इस आम के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं।

समाजसेवी दिनेश अग्रवाल ने बताया कि विदेश यात्राओं के दौरान उन्होंने इस प्रकार के आमों को देखा है। उन्होंने कहा कि मियाजाकी आम अपनी गुणवत्ता, स्वाद और आकर्षक रंग के कारण विश्व स्तर पर विशेष पहचान रखता है।

जानकारी के अनुसार, जापान के मियाजाकी प्रांत में उगाए जाने वाले इस आम को दुनिया के सबसे खास और महंगे फलों में गिना जाता है। पकने के बाद इसका रंग गहरा लाल अथवा बैंगनी हो जाता है, जिसके कारण इसे ‘रूबी रेड मैंगो’ भी कहा जाता है। इसकी चमक और रंगत इसे अन्य आमों से अलग बनाती है। देखने में यह किसी डायनासोर के अंडे या चमकते सूरज जैसा प्रतीत होता है।

इस आम की खेती अत्यंत वैज्ञानिक और नियंत्रित तरीके से की जाती है। जापान में इसे सामान्य बागों की बजाय आधुनिक ग्रीनहाउस में नियंत्रित तापमान के बीच उगाया जाता है। प्रत्येक फल को विशेष जालीदार थैली से ढककर रखा जाता है ताकि वह सुरक्षित रूप से पक सके और उसकी गुणवत्ता बनी रहे। पोषण की दृष्टि से भी मियाजाकी आम बेहद लाभकारी माना जाता है। इसमें पोटेशियम, फाइबर, विटामिन-सी, विटामिन-ए तथा फोलिक एसिड प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
हाल के वर्षों में भारत के कई प्रगतिशील किसानों ने भी मियाजाकी आम की सफल खेती की है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में इसके पौधों पर अच्छे फल प्राप्त हुए हैं। अब पश्चिमी चंपारण जिले के बगहा में भी इस दुर्लभ विदेशी आम का फल लगना क्षेत्र के लिए चर्चा और गौरव का विषय बन गया है। इसकी एक झलक पाने के लिए लोगों की भीड़ लगातार उमड़ रही है। इस दौरान मोबिन अंसारी, बाल सिंह, मकबूल खान, मोहम्मद साहिल, फिरोज आलम सहित कई स्थानीय लोग मौजूद रहे।












