बगहा। प्रखंड बगहा दो अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) हरनाटांड ने एक निजी अस्पताल के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. के. बीएन ने नगर पारस नगर, वार्ड संख्या-16 स्थित अखण्ड ज्योति आँख हॉस्पीटल को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर अस्पताल संचालन से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। निर्धारित समय सीमा के भीतर अभिलेख उपलब्ध नहीं कराने पर नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। पीएचसी द्वारा जारी कार्यालय आदेश के अनुसार, दुमवलिया निवासी राकेश कुमार सोनी ने अस्पताल के संचालन को लेकर कई बिंदुओं पर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में अस्पताल के संचालन, मानकों के अनुपालन तथा आवश्यक अनुमतियों से जुड़े मुद्दों को उठाया गया था। शिकायत प्राप्त होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच प्रक्रिया शुरू कर दी। जारी नोटिस में अस्पताल प्रबंधन से संस्थान का निबंधन प्रमाण-पत्र, चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के वैध शैक्षणिक और पेशेवर प्रमाण-पत्र, अस्पताल संचालन से जुड़े आवश्यक अभिलेख तथा निर्धारित स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप संचालन से संबंधित सभी दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया है। इसके अलावा अस्पताल संचालक को स्वयं उपस्थित होकर संबंधित कागजात उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया गया है।
प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि निर्धारित 24 घंटे की अवधि के भीतर मांगे गए दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाते हैं, तो संबंधित संस्थान के विरुद्ध एकतरफा एवं विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। विभागीय स्तर पर दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की इस पहल को निजी स्वास्थ्य संस्थानों की निगरानी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि क्षेत्र में संचालित सभी निजी अस्पताल निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप कार्य करें तथा मरीजों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों। सूत्रों के अनुसार, मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सतर्क है और अस्पताल द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों की गहन समीक्षा की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में संचालित अन्य निजी स्वास्थ्य संस्थानों में भी हलचल देखी जा रही है। माना जा रहा है कि विभाग की सख्ती से निजी अस्पतालों में जवाबदेही बढ़ेगी और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।












