यूरिया के लिए किसान परेशान लाइन में टोकन सिस्टम से मिल रहा है युरिया

बगहा-2 के बिस्कोमान कृषक सेवा केंद्र और ई-किसान भवन पर सोमवार को सुबह से ही सैकड़ों किसान लाइन में लगे हैं।
कई किसानों नें तो अपनी चप्पलें, हेलमेट, ईंट-पत्थर लाइन में लगाकर नंबर बचाए।
प्रशासन ने भीड़ कंट्रोल के लिए टोकन सिस्टम लागू किया है। हर किसान को सिर्फ 1 बोरा यूरिया मिल रहा है।
धान और गन्ने की फसल के समय यूरिया जरूरी है, लेकिन समय पर नहीं मिल रहा।
महिला किसान सुबह 6 बजे से लाइन में खड़ी हैं एक बोरा यूरिया से एकड़ की खेती नहीं होती, रकबे के हिसाब से खाद देने की मांग हो रही है।पंचायत स्तर के पैक्स और गोदाम से वितरण की मांग उठ रही है ताकि दूर के किसानों को बार-बार न आना पड़े।
BAO अभिषेक कुमार का कहना है कि सभी विक्रेताओं को उपलब्धता के अनुसार वितरण के निर्देश दिए गए हैं।
अधिक दर लेने वाले दुकानदारों पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है, लाइसेंस रद्द तक हो सकता है।
स्थिति अभी किल्लत बनी हुई है। किसान संघ और स्थानीय नेताओं ने जिला प्रशासन और केंद्रीय रसायन मंत्रालय से तत्काल आपूर्ति बढ़ाने की मांग की है।
बगहा में यूरिया के लिए किसान काफी परेशान हैं। पिछले 1-2 महीने से किल्लत और लाइन लगी
हुई है।
बगहा-2 के बिस्कोमान कृषक सेवा केंद्र और ई-किसान भवन पर सुबह से ही सैकड़ों किसान लाइन में लगे हैं।
कई किसानों ने तो अपनी चप्पलें, हेलमेट, ईंट-पत्थर लाइन में लगाकर नंबर बचाए।
प्रशासन ने भीड़ कंट्रोल के लिए टोकन सिस्टम लागू किया है। हर किसान को सिर्फ 1 बोरा यूरिया मिल रहा है।
यूरिया की सरकारी कीमत 267 रुपये है, लेकिन साथ में 225 रुपये की नैनो खाद लेना अनिवार्य कर दिया गया है।
इससे एक बोरा यूरिया 492 रुपये में पड़ रहा है।
किसानों का कहना है उन्हें नैनो खाद की जरूरत नहीं थी, लेकिन यूरिया के लिए मजबूरी में लेना पड़ रहा है। वहीं
बगहा-2 बिस्कोमान केंद्र पर 500 बोरी, देवरिया तरुअनवा पैक्स में 250 बोरी यूरिया ही उपलब्ध है।
सीमित स्टॉक के कारण कई किसान मायूस होकर लौट रहे हैं।
धान और गन्ने की फसल के समय यूरिया जरूरी है, लेकिन समय पर नहीं मिल रहा।
महिला किसान सुबह 6 बजे से लाइन में खड़ी हैं।
एक बोरा यूरिया से एकड़ की खेती नहीं होती, रकबे के हिसाब से खाद देने की मांग हो रही है।
पंचायत स्तर के पैक्स और गोदाम से वितरण की मांग उठ रही है ताकि दूर के किसानों को बार-बार न आना पड़े।
किल्लत बनी हुई है। किसान संघ और स्थानीय नेताओं ने जिला प्रशासन और केंद्रीय रसायन मंत्रालय से तत्काल आपूर्ति बढ़ाने की मांग की है।











